मिथिला में भ रहल जल संकट स बाँचब के लेल सब गोटे किछ नै त किछ जरूर करु।
जे मिथिलांचल बाढ़ि सऽ प्रभावित रहैत छल ओत्ता आई पाइन के समस्या बहुत बड़का समस्या बनि क पिछला किछु दिन में उभरल यै। ओना पानि के समस्या के त मिथिलांचल में बहुत कारण अइछ।
सबसँ बड़का कारण अइछ जे एहि जगह पर प्राचीन समय में बहुत बढियाँ वर्षा जल के संचयन के व्यवस्था छल। पोखैर, तालाब, डबरा, इनार, कुआँ सब एता पानि के कमी नै होवऽ दैत छल। एकर अलावा एता पहाड़ी नदी के सेहो कम्मी नै छल जाहि में सालों भरि पानि रहैत छलैक। विशेष रूप स मनुख आ माल मवेशी सब नदी के उपयोग नहेवा में करैत छलैथ। लोक सब बर्तन सेहो नदी में धोइत छलैथ। न पीयै के पाइन के दिक्कत छल नै कपड़ा,बर्तन, माल-मवेशी आ मनुख के नहाई-धोवऽ के दिक्कत छल। खेत-खरिहान के लोक सब नदी के मदद सऽ पटवईत छलैथ।
बाढ़ि एवाक कारणे जगह-जगह पर बान्ह बान्हि देल गेल। नाला सब के गंदगी सब के नदी में बहावल जाइत अइछ जाहि स चलायमान नदी एकदम निष्प्राण नाला जेना लगैत अइछ। ओहि में नदी वला एको टा गुण नहिं अइछ। जगह-जगह पर नदी में मवेशी के मरल हड्डी के ढाँचा (ओकरा मॉर कहल जाइत छैक) ओनाही नदी में जहाँ-तहाँ लागल अइछ। जाहि स नदी नहेवाक कि, किनारो में जेवाक इच्छा नहिं भऽ सकैत छैक। आ आब त कोनो-कोनो नदी जाहि में सालो धरि पानि रहैत छल से सब सुखि जाइत अइछ।
दोसर कारण अइछ जे जहाँ-तहाँ पोखरि, तालाब, डबरा सब के पर्याप्ता छल ओत्ता लोक सब ओकरा माँइट भरि कऽ घऽर, आँगन, दलान जे जेना कब्जा कऽ सकलनि से कऽ लेलैथ। ओहि स वर्षा जल के संचयन के समस्या उतपन्न भेल।
इनार, कुआँ सब के इस्टेण्डर लोक सब ऊपर सऽ ढलवा क घर बना देलनि। कतौ-कत्तौ तऽ ओकरा बिसरि गेलनि जे एकर प्राण-प्रतिष्ठा भेल छैक ओहि में घरक गंदगी निकलै वला नाला के जोड़ि देलनि हॉजक उपयोग में लऽ लेलनि। कियाकि त पिबै के पानि त नल आ चापाकल देवऽ लागल। ओकरा बिसरि गेलनि जे इहो कहियो काज द सकैत छैक।
जहाँ तहाँ अप्पन रास-वास लेल लोक सब गाछक कटाई शुरू कऽ देलनि। पहिले जूड़ शीतल सब सन पावैन में लोक गाछ लगबैत छल पर आब त साल में दस गो गाछ त निश्चित काटि दैत अइछ। गाछक अंधाधुंध कटाई स सेहो वर्षाक समस्या आबि गेल अइछ। माँटि के अपरदन होइतै अइछ और पर्यावरण पर प्रतिकूल स्थिति पड़ल अइछ। एहि सऽ मरुस्थल में विस्तार होइत अइछ।
मिथिलांचल के स्थानीय लोक सब एखन #पोखैर_बचाऊ अभियान में लागल छैथ। किछु लोक हुनक समर्थन करैत छैथ किछु गोटे सोचैत छैथ जे सोशल मीडिया बस सोशल मीडिया तके सीमित अइछ तैं एहि स किछु फायदा नहिं पहुँचत। लेकिन सब गोटे सऽ हम कहब जे भले ही एहि सऽ किछु नै होयत मुदा लोक जागरूक जरूर हेतैक। ओ आब एतेक त जानि गेलैन जे मिथलो में पाइन के अभाव भ सकैत अइछ तऽ यदि ओ जागरूक हेताह त आगू भविष्य में दिक्कत नै हेतैक।
प्राकृतिक आपदा के केऊ रोकि नै सकैत छैक मुदा ओकरा लेल अप्पन सुरक्षा व्यवस्था जरूर लोक के राखवाक प्रयास रहैत अइछ। तैं आई मिथिलांचल के दु-चारि गो हैशटैग सऽ यदि १ प्रतिशत बदलि जेवाक संभावना छैक त ओहि में कत्तौ कोताही नहिं हेवाक चाही। कियाकि त एखनो यदि प्रयास सही दिशा में कैल गेल त सफलता भेटब के संभावना बहुत अइछ।
#गाछ_लगाऊ
#पोखैर_बचाऊ।
#माँटि_बचाऊ
#पानि_बचाऊ
©रंजन कश्यप
अप्पन विचार पर आधारित एक टा सोच कोनो तरहक गलती के लेल क्षमा। 🙏
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