Tuesday, May 19, 2020

त्याग

ई दस साल बाद अप्पन गाम आबि रहल छी। मोन में अथाह प्रश्न अइछ अप्पन गाम के लऽ कऽ। आब गाम कतेक बदलि गेल हेतैक आओर कतेक रास नव लोक सब देखवा में एथिन और बहुत रंग के बात मोने मोन फुराईत छल। दस साल पहिने जखन हम गाम स निकलल छलहुँ त ओहि समय किछु हम्मर मनबरहु स्वभाव के भेनाई और भरि दिन गाम के छौरा सब साथे आवारागर्दी केनाई स बाबूजी तंग आबि गेल छलाह। एक दिन बाबूजी सँ मुँह लगा बैसलऊँ ओहि दिन बाबू कहला घर स निकल हमहुँ किछ सोच विचार नै क सकलौं आउर निकलि गेलियै ओकर पछतावा बहुत होइत रहल मुदा हम खुश सेहो छलौं जे कि ओई दिन हम निकल छलौंह तैं आई एक टा बेहतर जीवन जीबि रहल छी। एहि दस साल में कहियो-कताल माँ स चुप-चाप बातचीत होइ छल माँ सेहो वापस बजबैत छलीह लेकिन हमही हुनकर बात के नै सुनलौं। 

हम घर सँ शहर आबि गेलउँ त ओतय एक टा बढियाँ परिवार में नौकरी करवाक उद्देश्य स गेलौं मुदा भलेआदमी छलैथ ओ जे हमरा घरेलू नौकर नै घरेलू मास्टर बना लेलैथ। हमरा बहुत सपोर्ट भेटल ओतय हम हुनक बच्चा सभ के पढ़बैत छलहुँ आओर हुनका अप्पन पूरा कहानी कहलियैक त ओ हमरा बहुत मदद केलाह। हमरा ओ अपना पढ़ई में बहुत योगदान देलैथ और शहर के नामचीन भेलाह स हुनका कोनो समस्या नै होइत छल। हम अप्पन माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक ओत्तई स केलौं बाद में ओहि परिवार के मदद स हम जर्मनी चलि गेलौं आओर स्नातक जर्मनी में केलौं। जर्मनी स आबि पहिले हुनका स भेट करैत अप्पन गाम गेल छलहुं। हुनका स भेट केलाह त किछु पांच-छः साल भेल लेकिन गाम के दस साल भ गेल।

सोचैत-सोचैत हम अप्पन गाम के नज़दीक वला बज़ार में पहुँच रहल छलियै त हमरा बूढ़ी काकी के याद आबि गेल फेर हम एक टा मिठाइयक डिब्बा कीन लेलियै हुनका लेल। अपना घर लेल त जर्मनी स बहुत किछ लेने अबैत छलहुँ। आधा घंटा में घर पहुँचलौं घर पर सबसँ पहिने बाबूजी भेटलाह गोर लगलियैन त आशीर्वाद स ज्यादा हुनकर नोर बहि रहल छलैन। धीरे-धीरे आस पड़ोसक सब लोक सब देखवाक लेल एनाई शुरू क देलखिन सबके प्रणाम करैत एक-दू घंटा बीति गेल तहन फेर गाम में किछ बदलाब सेहो देखैत छलौं जे किछ दस साल पहिले नै छलैक। आब बहुत खुशी छलैह मोन में जे हम आई घर परिवार के साथ छी कखनो क हमरो नोर निकलि अबैत छल।


थोड़े समय बाद हम नहा क खाना खेलौं त माँ के बनाएल गेल खाना के एकदम मज़ा आबि रहल छल जे दस साल पहिले छल। हमरा एवाक कोनो सूचना नै छलैन त कोनो विशेष नै छल मुदा हमरा त आई भगवानक भेट भेल छल। किछु देर अराम केलाह के बाद हमरा बूढ़ी काकी के याद आबि गेल हम अप्पन बैग सँ मिठाई के डिब्बा निकालैत माँ के देलियै माँ ई डिब्बा बूढ़ी काकी के द देबैन। माँ हम्मर मुँह देखैत कहलैथ बौआ आब बूढ़ी काकी के कहाँ स देबहुन ओ त दु साल पहिले .......

हम बात बुझि गेलौं आओर मिठाई के ओत्तऽ छोड़ैत घर गेलौं काकी के बारे में सोचैत छलौंह याद आबि रहल छल हुनकर बात सब। सबसँ बेसी याद अबैत छल जहन ओ कहने छलीह जे, बौआ रे तू पढै पर धियान नै दैत छिही लेकिन तेज़ छिही कनि जे पढ़ि लेबऽ त नौकरी भ जेतौ। हम कहियैन काकी ठीक छै लेकिन आहाँ के केना पता। ओ कहैत छलीह जे अप्पन टोल में बुजुर्ग लोक सब मरि जाइत छै त नवतुरिया में केकरो नौकरी हेबे टा करैत छै हम मरि जेबौ त तोरा भ जेतौ। हम कहियैन काकी हम त एखन बच्चा छी और एखन आहाँ जीबू ने हम आहाँ के मिठाई खुआ देब तखन आहाँ मरऽब। काकी कहथिन जो तोहर सब के हिसाब नै बुझई छी आउर हमहुँ छोड़ि दियैक।

आई हुनकर याद आबि रहल छल जे हुनका कत्तेक बुझल छल दू साल पहिले ओ गत भेलीह और दू साल पहिले हम्मर .........। मोन आउर भारी भ गेल बैसल जा रहल छल आउर हम्मर आँखि स दसोधारा नोर निकलि रहल छल। 

हम सोचि रहल छलौंह जे हम्मर जिंदगी में कतेक त्याग छैक। बाबूजी और माँ के दस साल हम त्याग केलौं ओ सब हम्मर केलाह। हम जेत्ता गेलउँ ओ भल आदमी सब सेहो हमरा लेल त्याग केलैथ। लेकिन काकी के त्याग के त कोनो जोड़े नहिं छल जे कहली हम मरबौ त नौकरी हेतौ आउर सैह भेल। हमरा ओ सब आवारा दोस्त सब के याद सब, सब किछ खत्म भ गेल बस काकी याद छलीह।

नोट- ई कहानी एक टा काल्पनिकता पर आधारित अइछ। स्वरचित अइछ। एहि घटना के वास्तविक स्थिति स संबंध मात्र एक टा संयोग स भ सकैत अइछ।

                              धन्यवाद🙏
                                                  - रंजन कश्यप

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Monday, June 3, 2019

मिथिलांचलक जल संकट


मिथिला में भ रहल जल संकट स बाँचब के लेल सब गोटे किछ नै त किछ जरूर करु।
जे मिथिलांचल बाढ़ि सऽ प्रभावित रहैत छल ओत्ता आई पाइन के समस्या बहुत बड़का समस्या बनि क पिछला किछु दिन में उभरल यै। ओना पानि के समस्या के त मिथिलांचल में बहुत कारण अइछ।
सबसँ बड़का कारण अइछ जे एहि जगह पर प्राचीन समय में बहुत बढियाँ वर्षा जल के संचयन के व्यवस्था छल। पोखैर, तालाब, डबरा, इनार, कुआँ सब एता पानि के कमी नै होवऽ दैत छल। एकर अलावा एता पहाड़ी नदी के सेहो कम्मी नै छल जाहि में सालों भरि पानि रहैत छलैक। विशेष रूप स मनुख आ माल मवेशी सब नदी के उपयोग नहेवा में करैत छलैथ। लोक सब बर्तन सेहो नदी में धोइत छलैथ। न पीयै के पाइन के दिक्कत छल नै कपड़ा,बर्तन, माल-मवेशी आ मनुख के नहाई-धोवऽ के दिक्कत छल। खेत-खरिहान के लोक सब नदी के मदद सऽ पटवईत छलैथ।
बाढ़ि एवाक कारणे जगह-जगह पर बान्ह बान्हि देल गेल। नाला सब के गंदगी सब के नदी में बहावल जाइत अइछ जाहि स चलायमान नदी एकदम निष्प्राण नाला जेना लगैत अइछ। ओहि में नदी वला एको टा गुण नहिं अइछ। जगह-जगह पर नदी में मवेशी के मरल हड्डी के ढाँचा (ओकरा मॉर कहल जाइत छैक) ओनाही नदी में जहाँ-तहाँ लागल अइछ। जाहि स नदी नहेवाक कि, किनारो में जेवाक इच्छा नहिं भऽ सकैत छैक। आ आब त कोनो-कोनो नदी जाहि में सालो धरि पानि रहैत छल से सब सुखि जाइत अइछ।
दोसर कारण अइछ जे जहाँ-तहाँ पोखरि, तालाब, डबरा सब के पर्याप्ता छल ओत्ता लोक सब ओकरा माँइट भरि कऽ घऽर, आँगन, दलान जे जेना कब्जा कऽ सकलनि से कऽ लेलैथ। ओहि स वर्षा जल के संचयन के समस्या उतपन्न भेल।
इनार, कुआँ सब के इस्टेण्डर लोक सब ऊपर सऽ ढलवा क घर बना देलनि। कतौ-कत्तौ तऽ ओकरा बिसरि गेलनि जे एकर प्राण-प्रतिष्ठा भेल छैक ओहि में घरक गंदगी निकलै वला नाला के जोड़ि देलनि हॉजक उपयोग में लऽ लेलनि। कियाकि त पिबै के पानि त नल आ चापाकल देवऽ लागल। ओकरा बिसरि गेलनि जे इहो कहियो काज द सकैत छैक।
जहाँ तहाँ अप्पन रास-वास लेल लोक सब गाछक कटाई शुरू कऽ देलनि। पहिले जूड़ शीतल सब सन पावैन में लोक गाछ लगबैत छल पर आब त साल में दस गो गाछ त निश्चित काटि दैत अइछ। गाछक अंधाधुंध कटाई स सेहो वर्षाक समस्या आबि गेल अइछ। माँटि के अपरदन होइतै अइछ और पर्यावरण पर प्रतिकूल स्थिति पड़ल अइछ। एहि सऽ मरुस्थल में विस्तार होइत अइछ।
मिथिलांचल के स्थानीय लोक सब एखन #पोखैर_बचाऊ अभियान में लागल छैथ। किछु लोक हुनक समर्थन करैत छैथ किछु गोटे सोचैत छैथ जे सोशल मीडिया बस सोशल मीडिया तके सीमित अइछ तैं एहि स किछु फायदा नहिं पहुँचत। लेकिन सब गोटे सऽ हम कहब जे भले ही एहि सऽ किछु नै होयत मुदा लोक जागरूक जरूर हेतैक। ओ आब एतेक त जानि गेलैन जे मिथलो में पाइन के अभाव भ सकैत अइछ तऽ यदि ओ जागरूक हेताह त आगू भविष्य में दिक्कत नै हेतैक।
प्राकृतिक आपदा के केऊ रोकि नै सकैत छैक मुदा ओकरा लेल अप्पन सुरक्षा व्यवस्था जरूर लोक के राखवाक प्रयास रहैत अइछ। तैं आई मिथिलांचल के दु-चारि गो हैशटैग सऽ यदि १ प्रतिशत बदलि जेवाक संभावना छैक त ओहि में कत्तौ कोताही नहिं हेवाक चाही। कियाकि त एखनो यदि प्रयास सही दिशा में कैल गेल त सफलता भेटब के संभावना बहुत अइछ।
#गाछ_लगाऊ
#पोखैर_बचाऊ
#माँटि_बचाऊ
#पानि_बचाऊ
©रंजन कश्यप
अप्पन विचार पर आधारित एक टा सोच कोनो तरहक गलती के लेल क्षमा। 🙏


Friday, March 15, 2019

जूड़ शीतल

  झा जी सिन्दरी,बिहार (वर्तमान झारखंड तत्कालीन बिहार) में एक टा खाद के कारखाना में मुंसी के काज करैत छलनि। बहुत कर्मठ लोक छलैथ झा जी, आ कारखाना में हुनका एगो निम्नवर्गीय कर्मचारी सफाई वला सँ ल क मैनेजर तक सबसँ बहुत बढियाँ सम्बन्ध छलैन। कारखाना के मनेजर ओहि समय में बेगूसराय के एक टा ठाकुर जी रहथि दूनू गोटे मैथिल रहथि तँ हुनका दुनू के किछु जादा दोस्ती छलनि। झा जी कर्मठ लोक छलाह तैं हिनका ठाकुर जी बेसी मानथीन। दुनू गोटे के परिवार में सेहो किछु जादे दोस्ती छलैन।
             १० बरष पहिने एक टा एक्सीडेंट में झा जी के बेटा, पुतौह आ पोता के मृत्यु भ गेल छलनि। झा जी के कनियाँ आ एक टा पोती छलनि जे कि गाँव (मधुबनी) में रहैत छलथिन। झा जी महीना में दू-तीन दिन के लगातार छुट्टी भेला पर सेहो गाँव आइब जाइत छलाह। पोती लेल किछु उपहार लैये क अबैत छलाह चाहे कतबो कम दिन गेला किया नै भेल हो। ठाकुर जी के हिनका घर के बारे में सब किछु पता छलैन त उ सेहो हिनकर दरमाहा  दै में देरी नै करथिन अगर कोनो कारण स देर भ जायत छल त उ अपन घर स दैत छलाह फेर बाद में मिलला पर उ राइख लैत छलाह। कियाकि ठाकुर जी त बुझैत छलाह जे कि हिनक परिवार में बस इहै एक टा कमौआ छैथ। १० साल पहिले जखन हिनक बेटा के एक्सीडेंट भ गेल छलैन तहन हिनकर पोती मात्र डेढ़ साल के रहैन मुदा दुनू प्राणी मिल क आब ओकरा पालि पोसि क नमहर केलैन। आब त उ बच्चा तेसर क्लास के विद्यार्थी भ गेलैक।
        झा जी के पोती के बड़ चिंता छलैन कियाकि त ओकर पढ़ाई-लिखाई आ बियाह तक के चिंता केनिहार एगो झा जी त छलाह। अप्पन दरमाहा में उ जे किछु खेनाइ आर रहनाइ में खर्च करैत रहैथ ओकर अलावा सब पाई के उ हिसाब स खर्च करैत छलाह। झा जी पुरना समय के इंटर पास छलैथ त इ छुट्टी के बाद कारखाना के कर्मचारी सबहक धीया-पूता सब के पढ़ा दैत छलैथ। जे कर्मचारी सबहक घर दूर छलैक उ अप्पन परिवार समेत सिन्दरी में रहैत छलैक। उ कारखाना स बाहर के किछु बच्चा के सेहो पढ़बैत छलाह ओहि स जे किछु आमदनी भ जैन ओहि पाई के उ पोती के स्कूल और ट्यूशन फीस में खर्च करैत रहैथ। कारखाना में झा जी के ग्रामीण एगो सुनील झा जी के परिवार रहैत छल। झा जी हुनक बच्चा के सेहो पढ़ा दैत रहथिन, हुनक पत्नी हिनका खाना नै बनाबँ दैत रहथिन, त ई हुनके लग खाइत रहैथ। झा जी सेहो हुनक बच्चा के पढ़बै के फीस नै लैत छलाह।
             एक बेर झा जी के कारखाना में टाङ में चोट लाईग गेल रहनि त भरि दिन हिनक डेरा पर एनिहार-गेनिहार के कमी नहिं छल। सुनील झा के परिवार हिनक खूब मोन सँ सेवा केलनि। हिनक ४-५ दिन में टाङ ठीक भ गेलैक त ई कारखाना जेनाई शुरु क देलनि। कारखाना में हिनका देखि क ठाकुर जी आगि भ गेलाह।
ठाकुरजी-आँहाँ किया एलौं एहन स्थिति में यौ?
झा जी- आब हम ठीक छी पूरा, देखू हैयै (झा जी चैल क देखा देलखिन)।
ठाकुरजी- तैयो!
झा जी- अरे छोड़ू न।
ठाकुरजी- हम त एखनो कहब जे नैहे आबू, मुदा आँहाँक जे इच्छा।
झा जी - आब हम ठीक छी, हम ऐबे करब मुफ्त के दरमाहा हम नईं लेब।
ठाकुर जी- आँहाँ के जे इच्छा।
           होली के समय आइब गेल छल ओहि में झा जी गाम नै जाइत छलैथ कियाकि त होली स दू-तीन दिन पहिने हुनक घर मे १० बरष पहिने हादसा भेल छल, से होली आबैत याद पड़ि जैन। मुदा एहि साल होली सँ दस दिन पहिने ठाकुर जी के ट्रांसफर हरियाणा भ गेलैक, सब गोटे हुनका विदाई केलैन। ठाकुर जी हरियाणा चैल गेलाह। कारखाना में ठाकुर जी के जगह पर हरियाणा के मैनेजर आइब गेल छल। नबका मैनेजर के केकरो स बनिते नहिं छल। बात-बात पर  बेमतलब के मजदूर सब के डाँटि दैत छलैक। झा जी बहुत समझेलनि जे सर ई सब मजदूर को बेमतलब नईं डाँटिए मुदा हुनका पर कोनो प्रभाव नहिं, उ कहै जे आप सजेशन मत दीजिए आप मुंसी है हमारे बॉस नहीं। झा जी चुप भ जाइत छलैथ।
            झा जी के आब मोन नै लगैत छलैन हरदम सोचैथ जे नोकरी छोड़ि देब मुदा पोती के याद आबि जैन कि यदि हम नै कमेबै त फेर ओकर पढ़ाई लिखाई शादी बियाह के की हेतै। एक महीना भेल कि जूड़ शीतल के समय आइब गेल। दू दिन पहिने हिनका पोती के चिठ्ठी भेटल जाहि में हुनका कहल गेल छल  जे बाबा जूड़ शीतल में आँहाँ आइब जाऊ और हमर चौथा वर्ग के लेल किताब-कॉपी सेहो कीन देब। झा जी कहलखिन जे ठीक छै हम जूड़ शीतल में आइब जैब। झा जी ओहि दिन काम पर गेलाह शाम में काम खत्म करवा के बाद ओ मैनेजेर लग पहुँचला।
झा जी- सर हमको दू दिन के छुट्टी चाहिए।
मैनेजर- क्यो? क्या बात है?
झा जी- सर कल जूड़ शीतल है तो आज रात में हम गाड़ी पकड़ेंगे घर जाने के लेल। आर परसू हम अपना पोती के नया किलास के कॉपी-किताब कीनेंगें अगला दिन हम काम पर आ जाएँगें।
मैनेजर- अरे झा जी ये जूड़ शीतल क्या है? इसका तो यहाँ कोई छुट्टी नहीं है।
झा जी- जी सर जूड़ शीतल के कोनो छुट्टी नै है लेकिन इ हमलोग का पर्व होता है।
मैनेजर- नहीं, हम आपको छुट्टी नहीं दे सकते है।
झा जी- पर सर किताब-कॉपी पोती का…..।
मैनेजर- पर वर कुछ नहीं आपको कल आना है काम पर।
            झा जी दुःखी मोन स आइब गेलाह डेरा पर सीधे आइब क सूति रहला। कनी देर में सुनील झा के पत्नी हिनक खाना ल क आइब गेलथिन।
कनियाँ- कक्का गाम नै जेबाक छैन कि?
झा जी- नै कनियाँ।
कनियाँ- किया यौ?
झा जी- छुट्टी नै देलक।
कनियाँ- पर छोटी के किताब-कॉपी…..?
झा जी- पता नै हम त होली में कहियो नै जाइत छलौं पर जूड़ शीतल में दस दिन के छुट्टी ल क जाइत छलहुँ त गहूम कटा क दौनी करवा क अबैत रही। एहि बेर टाङ में चोट लाईग गेल त छुट्टी केने रहियै ४-५ दिन त सोचलियै जे दू दिन में वापस आइब जेबै। जोन के लगा देबैक खेत में आ छोटी के दादी के सब किछु समझा क, मुदा आब त छुट्टी नै भेल। एखन ठाकुर जी रहिता त हम दस दिन कहितौ त बीस दिन के दैतैथ मुदा आब त उ….।
कनियाँ- छोड़ौथ न हुनकर बात उ त सब के मानैत छलथिन, पर इ मनेजरा सनकल अइछ।
झा जी- हाँ आब देखथुन कि होई छैक।
            झा जी राईत में खाना नै खेलनि। लेकिन भोर में धाञ-धाञ उठि क तैयार भेलाह आ सोचलनि जे भ सकैत यै जे काइल मैनेजर के मूड खराब रहैक त छुट्टी नै देलकैक त कि भ गेलैक जूड़ शीतल त भ गेलै मुदा छोटी के त किताब-कॉपी कीन देबै। झा जी तैयार भ काम पर चैल देलाह। रस्ता में एक टा कार हिनका आगू स निकलल त रोड पर बला किछु कादो हिनका परि गेलैन इ बिसैर गेलाह जे कहाँ छी, ओत्तै इ एक मुट्ठी कादो हाथ मे लेलाह जैं कि गाड़ी रुकल इ फेंकवा के प्रयास में तैयार भ गेलाह। मुदा जहन गाड़ी स एगो महिला निकलल त इ ठमकि गेलाह। हिनका याद एलैन जे हम गाम पर नै छी आर एत्तँ जूड़ शीतल नै छैक। महिला निकलि क हिनका सॉरी कहलैनि तँ इहो कहि देलखिन कोनो बात नै छैक तहने गाड़ी के दोसर गेट खुजलै आ एगो आदमी बाहर निकलल त झा जी देखिते रहि गेलाह उ आओर केओ नै हिनके मैनेजर छलैक आ ओ महिला हुनक पत्नी छलीह। मैनेजर हिनका देख क तुरंत बूझि गेलैक जे ई हमर पत्नी पर कादो मारवा चाहै छलैक। उ नै किछु बाजल आ चुपचाप गाड़ी में बैस क चैल गेल।
           झा जी सेहो बुझि गेलाह जे आब छुट्टी त नहिं मिलत मुदा तैयो पहुँचि क ओ एक बेर मनेजर के कहलनि।
झा जी- सर जी कल तो छुट्टी नहीं दिए आजो दीजियेगा त हम चल जाएँगे।
मैनेजर- आपको बहुत छुट्टी का जरूरत है आप नोकरी छोड़ दीजिये और खूब छुट्टी कीजियेगा खूब जूड़ शीतल मनाइयेगा।
झा जी- वैसे भी पहले परिवार तब न नोकरी। जूड़ शीतल तो हम मनाएँगे हीं।
मनेजर- चले जाइए खूब मनाइए जूड़ शीतल।
          झा जी कारखाना स निकलि डेरा गेलाह जे किछु समान छलैक डेरा में से सब ल क चैल देलाह सुनील झा के कनियाँ के कहलनि जे।
झा जी- कनियाँ हम गाम पर जाइत छियैन।
कनियाँ- छुट्टी भेट गेलैन कि?
झा जी- हमेशा के लेल हम नोकरी छोड़ि देलौं।
              एत्ते कहैत झा जी जल्दी सँ स्टेशन चैल देलाह ट्रेन पकड़ि क गाम पर आइब गेलाह। प्रात भेने सबसँ पहिने उ पोती के किताब-कॉपी कीन देलखिन। आ गहूम के कटनी-दौनी में लाईग गेलाह। जखन हिनका एला दस दिन स बेसी भ गेलैन त हिनकर पत्नी पुछलैन।
पत्नी- काम पर नै जेबै कि?
झा जी- नै।
पत्नी- किया यौ?
झा जी- छोड़ि देलियै।
पत्नी- त आब की करबै?
झा जी- एत्ते किछ करबै।
पत्नी- केहन नीक छलै जे आँहाँ ओत्तै छलौं, आब  एत्तँ बुड़हारी में कि करबै?
झा जी- किछु नै हेतै त अप्पन जेते खेत छै ओहि में खेती क देबै तैयो हमरा सब के गुजर भ जेतैक।
पत्नी- अच्छा हमहूँ देखै छी जे आँहाँ की करबै?
झा जी- बस आँहाँ देखैत जैयो। हम कि करैत छी।
           झा जी अप्पन सब खेत मे खूब मेहनत सँ खेती केनाई शुरू केला हिनका एहि बेर जेत्ते गहूम भेलैन सब के बेच क इ सिन्दरी गेलाह आर सब पाई के खाद कीन लेलैथ। हिनका एला के बाद ओत्त के मुंसी सुनील झा भ गेल रहथिन। सुनील झा हिनका थोक भाव पर खाद दिया देलनि। इ आइब क गाम पर एक टा खाद-बीज के दोकान खोललैन सबसँ पहिले इ अप्पन खेत में दैथिन तहन बेचैत रहैथ। अगल बगल के गाँव में सेहो एहन कुनो दोकान नै रहै त हिनकर दोकान खूब चलँ लगलैक। इ सस्ता में बढ़ियाँ समान बेचै छलाह त खूब कमाई होवँ लगलैक।
            समय धाञ-धाञ बीतलै, झा जी पूरा क्षेत्र में सबसँ जादा खाद-बीज बेचि क रेकॉर्ड बनेला। हिनका ओत्त कारखाना वाला मनेजर प्रोग्राम रखवा के लेल निमंत्रण देलकैक। झा जी तैयार भ गेलखिन। आब त झा जी एक बेर में २०-२५ ट्रक क खाद-बीज लेवँ लगला लगभग १०० लेबर रखने रहथि। १० साल में झा जी बहुत आगू बढ़ि गेलैन। पूरा क्षेत्र में झा जी के चर्चा छलैक।
              उ दिन आइब गेलै जहिया झा जी के ओहि ठाम प्रोग्राम होयतैक। मंच सब तैयार भेल छल बहुत मीडिया वाला सब एल छल। खूब प्रसन्नता के माहौल छलैक। झा जी मंच पर सबहक इंतेज़ार में बैसल छलाह २-३ मिनट के बाद उ कंपनी के अधिकारी सब के गाड़ी एनाई शुरू भ गेल। ओहि में स एक टा गाड़ी सँ ठाकुर जी निकलला, झा जी चीन्ह गेलखिन ठाकुर जी के आ ठाकुर जी सेहो चिन्हलैन दुनू गोटे भेंट केला गला मीलि क ठाकुर जी कहैत छथिन।
ठाकुर जी- की हाल चाल छै यौ?
झा जी- बहुत बढ़िया अप्पन कहियौ.
ठाकुर जी- अप्पनो बढ़ियाँ छैक। ओत्तँ स चैल एलियै हम बदली के दू महीना बाद आएल छलहुँ मुदा सुनील जी कहलनि जे आब ओ गाम पर रहैत छैथ एत्तँ काम छोड़ल हुनका १ महीना भ गेल।
झा जी- आँहाँ गेलियै उहै महीना हम काम छोइर देलौं।
ठाकुर जी- किया नबका मनेजर ठीक नै रहैथ कि?
झा जी- नै बहुत नीक छलैथ हमही नै काज करब में सकैत छलहुँ।
ठाकुर जी- चलू कोनो बात नै छै काज छोरलौ त न आई एत्ते बड़का गोदाम अइछ एत्ते मजदूर अइछ। ओत्तँ काज करैत रहि आओर एत्तँ करवाबैत छी बढ़िया यै न।
झा जी- हाँ एत्तँ कम स कम घर के चिंता त नै अइछ।
          बाते बात में पाछा स आवाज एलैक हेलो सर बहुत बहुत बधाई आओर एक टा गुलदस्ता वला आदमी झा जी के गुलदस्ता देलखिन झा जी गुलदस्ता लैत धन्यवाद कहलनि। ओ आदमी मुँह ताकैत रहि गेल आ झा जी सेहो। दुनू गोटे एक दोसर के चीन्ह गेलैन, लेकिन किछु बाजिता ओहि स पहिने कार्यक्रम शुरू भ गेल। उ आदमी और केऊ नै उहै मनेजर छलैक जे हिनका जूड़ शीतलक छुट्टी देने रहैक। उ जूड़ शीतलक छुट्टी झा जी एखनों धरि नहिं बिसरल छलाह।
             कार्यक्रम शुरू भेलैक सब गोटे झा जी के खूब प्रसंसा केलनि जे मात्र ५ साल में इ एत्ते आगा बढ़ला आओर १० साल में हिनक केऊ हाथ पकड़नाहर नहिं छैन। कंपनी के अधिकारी सब सेहो प्रसन्न छलैथ सब झा जी और हुनक परिवार लेल उपहार सब अनने रहथि। सब किछु भेला के बाद प्रेस वला सब सवाल पूछनाई शुरू केलकैन।
प्रेस- झा जी आप पहले एक मुंसी थे कंपनी में आज आपका चर्चा कंपनी में चल रहा है शुरू में तो आपको दिक्कत आयी होगी?
झा जी- जब हमने इस दुकान की शुरूआत की थी तब भी और आज भी हम खेती कर रहें हैं हम एक भी खाद या बीज बिना उपयोग के नहीं बेचते और दाम भी सुविधाजनक रखते है इसी लिए हमको कोई परेशानी नहीं हुई।
प्रेस- आप मुंसी से इतने बड़े विक्रेता कैसे बने?
झा जी- ये एक बड़ी सी कहानी है।
प्रेस- क्या हम जान सकते हैं कि आपके इतने बड़े विक्रेता बनने में किन सबका योगदान रहा?
झा जी- जी बिल्कुल।
प्रेस- तो बताइए..
झा जी- इसमें सबसे बड़ा योगदान हमारे उस समय कारखाने के मैनेजर का था अगर वो उस समय जूड़ शीतल की छुट्टी न देते तो शायद आज हम इतने बड़े विक्रेता नहीं होते।
              बस सब बैसल लोक ताली बजेनाई शुरू केलखिन। मनेजर जे छलैथ हुनका आँखि स नोर चूवँ लागल आ झा जी के सेहो। मनेजर आइब कँ झा जी स गला मिल माँफी माँगँ लागल झाजी बाजि उठला जे माँफी आप नहीं माँगिये बल्कि हम आपको धन्यवाद करते है। कि यदि आप मुझे जूड़ शीतल का छुट्टी न देते तो शायद हम आज भी वहीँ मुंसी होते और मेरा इतना नाम न होता। सब लोक सब हुनका दुनू गोटे के देखैत रहि गेल।
                                            

                                                - रंजन  कश्यप
नोट- इ कहानी के कोनो भी वास्तविक जिनगी स कोनो संबंध नै अइछ इ सब मात्र एक टा सोच पर आधारित अइछ। वास्तविक जिनगी स संबंध एकटा संजोगे स भ सकैत अइछ।

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