आई दस साल बाद अप्पन गाम आबि रहल छी। मोन में अथाह प्रश्न अइछ अप्पन गाम के लऽ कऽ। आब गाम कतेक बदलि गेल हेतैक आओर कतेक रास नव लोक सब देखवा में एथिन और बहुत रंग के बात मोने मोन फुराईत छल। दस साल पहिने जखन हम गाम स निकलल छलहुँ त ओहि समय किछु हम्मर मनबरहु स्वभाव के भेनाई और भरि दिन गाम के छौरा सब साथे आवारागर्दी केनाई स बाबूजी तंग आबि गेल छलाह। एक दिन बाबूजी सँ मुँह लगा बैसलऊँ ओहि दिन बाबू कहला घर स निकल हमहुँ किछ सोच विचार नै क सकलौं आउर निकलि गेलियै ओकर पछतावा बहुत होइत रहल मुदा हम खुश सेहो छलौं जे कि ओई दिन हम निकल छलौंह तैं आई एक टा बेहतर जीवन जीबि रहल छी। एहि दस साल में कहियो-कताल माँ स चुप-चाप बातचीत होइ छल माँ सेहो वापस बजबैत छलीह लेकिन हमही हुनकर बात के नै सुनलौं।
हम घर सँ शहर आबि गेलउँ त ओतय एक टा बढियाँ परिवार में नौकरी करवाक उद्देश्य स गेलौं मुदा भलेआदमी छलैथ ओ जे हमरा घरेलू नौकर नै घरेलू मास्टर बना लेलैथ। हमरा बहुत सपोर्ट भेटल ओतय हम हुनक बच्चा सभ के पढ़बैत छलहुँ आओर हुनका अप्पन पूरा कहानी कहलियैक त ओ हमरा बहुत मदद केलाह। हमरा ओ अपना पढ़ई में बहुत योगदान देलैथ और शहर के नामचीन भेलाह स हुनका कोनो समस्या नै होइत छल। हम अप्पन माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक ओत्तई स केलौं बाद में ओहि परिवार के मदद स हम जर्मनी चलि गेलौं आओर स्नातक जर्मनी में केलौं। जर्मनी स आबि पहिले हुनका स भेट करैत अप्पन गाम गेल छलहुं। हुनका स भेट केलाह त किछु पांच-छः साल भेल लेकिन गाम के दस साल भ गेल।
सोचैत-सोचैत हम अप्पन गाम के नज़दीक वला बज़ार में पहुँच रहल छलियै त हमरा बूढ़ी काकी के याद आबि गेल फेर हम एक टा मिठाइयक डिब्बा कीन लेलियै हुनका लेल। अपना घर लेल त जर्मनी स बहुत किछ लेने अबैत छलहुँ। आधा घंटा में घर पहुँचलौं घर पर सबसँ पहिने बाबूजी भेटलाह गोर लगलियैन त आशीर्वाद स ज्यादा हुनकर नोर बहि रहल छलैन। धीरे-धीरे आस पड़ोसक सब लोक सब देखवाक लेल एनाई शुरू क देलखिन सबके प्रणाम करैत एक-दू घंटा बीति गेल तहन फेर गाम में किछ बदलाब सेहो देखैत छलौं जे किछ दस साल पहिले नै छलैक। आब बहुत खुशी छलैह मोन में जे हम आई घर परिवार के साथ छी कखनो क हमरो नोर निकलि अबैत छल।
थोड़े समय बाद हम नहा क खाना खेलौं त माँ के बनाएल गेल खाना के एकदम मज़ा आबि रहल छल जे दस साल पहिले छल। हमरा एवाक कोनो सूचना नै छलैन त कोनो विशेष नै छल मुदा हमरा त आई भगवानक भेट भेल छल। किछु देर अराम केलाह के बाद हमरा बूढ़ी काकी के याद आबि गेल हम अप्पन बैग सँ मिठाई के डिब्बा निकालैत माँ के देलियै माँ ई डिब्बा बूढ़ी काकी के द देबैन। माँ हम्मर मुँह देखैत कहलैथ बौआ आब बूढ़ी काकी के कहाँ स देबहुन ओ त दु साल पहिले .......
हम बात बुझि गेलौं आओर मिठाई के ओत्तऽ छोड़ैत घर गेलौं काकी के बारे में सोचैत छलौंह याद आबि रहल छल हुनकर बात सब। सबसँ बेसी याद अबैत छल जहन ओ कहने छलीह जे, बौआ रे तू पढै पर धियान नै दैत छिही लेकिन तेज़ छिही कनि जे पढ़ि लेबऽ त नौकरी भ जेतौ। हम कहियैन काकी ठीक छै लेकिन आहाँ के केना पता। ओ कहैत छलीह जे अप्पन टोल में बुजुर्ग लोक सब मरि जाइत छै त नवतुरिया में केकरो नौकरी हेबे टा करैत छै हम मरि जेबौ त तोरा भ जेतौ। हम कहियैन काकी हम त एखन बच्चा छी और एखन आहाँ जीबू ने हम आहाँ के मिठाई खुआ देब तखन आहाँ मरऽब। काकी कहथिन जो तोहर सब के हिसाब नै बुझई छी आउर हमहुँ छोड़ि दियैक।
आई हुनकर याद आबि रहल छल जे हुनका कत्तेक बुझल छल दू साल पहिले ओ गत भेलीह और दू साल पहिले हम्मर .........। मोन आउर भारी भ गेल बैसल जा रहल छल आउर हम्मर आँखि स दसोधारा नोर निकलि रहल छल।
हम सोचि रहल छलौंह जे हम्मर जिंदगी में कतेक त्याग छैक। बाबूजी और माँ के दस साल हम त्याग केलौं ओ सब हम्मर केलाह। हम जेत्ता गेलउँ ओ भल आदमी सब सेहो हमरा लेल त्याग केलैथ। लेकिन काकी के त्याग के त कोनो जोड़े नहिं छल जे कहली हम मरबौ त नौकरी हेतौ आउर सैह भेल। हमरा ओ सब आवारा दोस्त सब के याद सब, सब किछ खत्म भ गेल बस काकी याद छलीह।
नोट- ई कहानी एक टा काल्पनिकता पर आधारित अइछ। स्वरचित अइछ। एहि घटना के वास्तविक स्थिति स संबंध मात्र एक टा संयोग स भ सकैत अइछ।
धन्यवाद🙏
- रंजन कश्यप
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